नवग्रह पूजा करने से अच्छे स्वास्थ्य, ज्ञान, समृद्धि, सद्भाव, सफलता का वरदान प्राप्त होता है.
नवग्रह पूजा करते समय उनके सभी मंत्रों का जाप करने से कार्यों में आने वाली बाधा दूर हो जाती है.
और रुके हुए काम भी पूरे हो जाते हैं कई पूजा व्यक्तिगत ग्रहों की पूर्ति के लिए की जाती है.
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मंगल का अष्टम भाव में होना विवाह के सुख में कमी,
ससुराल के सुख में कमी लाता है साथ ही ससुराल पक्ष से रिश्तो में कला उत्पन्न करता है वही द्वादश भाव में मंगल बैठा है तो वैवाहिक जीवन में कठिनाइयां शारीरिक क्षमताओं में कमी रोग जैसी समस्याओं से जीवन भर लड़ना पड़ता है. एवं कई बार ऐसा भी होता है रिश्ता टूट भी जाता है.
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शतचंडी पाठ से मनुष्य के जीवन में विशेष परिस्थितियों में जैसे शत्रु पर विजय, मनवांछित फल, नौकरी की प्राप्ति, नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में वृद्धि, परिवार में कलह, क्लेश से मुक्ति, एवं विभिन्न प्रकार की परेशानियों से मुक्ति आदि के लिए यह पाठ कराया जाता है
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महामृत्युंजय पूजन कराने से,
पुत्र की प्राप्ति, अकाल मृत्यु से बचने के लिए, मांगलिक दोष, नाडी दोष ,कालसर्प दोष, भूत-प्रेत दोष, रोग दुख-स्वप्न ,गर्भ-नाश, संतान बाधा, कई दोषों का नाश होता है.दीर्घायु लंबी उम्र की प्राप्ति होती है, एवं शारीरिक कष्ट से मुक्ति मिलती है.
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